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बादल फटने से तबाही, अब तक 4 की मौत
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धाराली गाँव में 4 अगस्त 2025 को सुबह-सुबह एक भयावह हादसा हुआ जब तेज बारिश के बाद इलाके में बादल फट गया। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे गाँव को हिला कर रख दिया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में 11 भारतीय सेना के जवान भी शामिल हैं।
150 से अधिक लोग रेस्क्यू, सेना और NDRF मौके पर तैनात
रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चल रहा है। अब तक 150 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
भारतीय सेना, NDRF, SDRF, और स्थानीय पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी बचाव कार्यों में लगाए गए हैं।
अधिकारी के अनुसार, “रेस्क्यू टीमों को पहाड़ी इलाके और मलबे की वजह से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन हमारा लक्ष्य है कि हर एक नागरिक और सैनिक को सुरक्षित निकाला जाए।”

11 सैनिक लापता, सेना की निगाहें अपने साथियों की खोज पर
सबसे चिंता का विषय यह है कि इस आपदा में भारतीय सेना के 11 जवानों का भी कुछ पता नहीं चल पाया है।
ये जवान एक कैंप में तैनात थे जो बादल फटने के समय जलप्रवाह की चपेट में आ गया। उनके परिजनों और देशभर से लोगों की दुआएं लगातार आ रही हैं। सेना हर संभव प्रयास कर रही है उन्हें सुरक्षित ढूंढने के लिए।
मूसलाधार बारिश और लैंडस्लाइड ने बढ़ाई मुश्किलें
हादसे के बाद से इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) जारी हैं, जिससे बचाव अभियान में और कठिनाइयाँ आ रही हैं। कई गाँवों का संपर्क टूट गया है। सड़कों पर मलबा जमा हो गया है जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में देरी हो रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने तेज गर्जना और अजीब सी आवाजें सुनीं जिसके बाद अचानक पानी और मलबे ने सब कुछ बहा दिया। कई घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।

राज्य सरकार और प्रधानमंत्री ने जताया दुख, राहत पैकेज की घोषणा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने तुरंत उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज करने के आदेश दिए।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है और प्रधानमंत्री राहत कोष से मुआवज़ा देने की घोषणा की गई है।
सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹5 लाख, गंभीर रूप से घायलों को ₹50,000 और बेघर हुए लोगों के लिए राहत शिविर और राशन की व्यवस्था की है।
धाराली की यह त्रासदी एक बार फिर याद दिलाती है कि पहाड़ी राज्यों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए और मजबूत ढांचा चाहिए। जहां सरकार राहत में जुटी है, वहीं देश को एकजुट होकर इस मुश्किल घड़ी में उत्तराखंड के साथ खड़ा होना चाहिए।
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