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ड्रोन युद्ध और ‘कोल्ड स्टार्ट 2025’ की अहमियत
21वीं सदी का युद्ध अब केवल टैंक और मिसाइलों से नहीं लड़ा जा रहा, बल्कि ड्रोन तकनीक ने युद्धक रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक, ड्रोन की भूमिका निर्णायक साबित हुई है। भारत भी इन खतरों से अछूता नहीं है।
‘कोल्ड स्टार्ट 2025’ इसी संदर्भ में भारत का अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन और काउंटर-ड्रोन अभ्यास होगा। यह अक्टूबर 2025 में राजस्थान, गुजरात और पंजाब के सैन्य क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सेना को ड्रोन युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करना, नए तकनीकी समाधानों को परखना और मित्र देशों के साथ अनुभव साझा करना है।
पाकिस्तान की चुनौती और भारत का रणनीतिक जवाब
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की ओर से कई बार ड्रोन घुसपैठ की घटनाएँ हुई हैं। इनका इस्तेमाल हथियार, नशीली दवाओं और जासूसी के लिए किया गया। बीएसएफ ने सिर्फ दो साल में 400 से ज्यादा ड्रोन पकड़े या गिराए।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि ड्रोन अब सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। भारत का ‘कोल्ड स्टार्ट’ अभ्यास न केवल तकनीकी तैयारी बल्कि पड़ोसी देशों को संदेश देने का भी तरीका है कि भारत इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। इस अभ्यास के दौरान भारतीय सेना अपने स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स का भी प्रदर्शन करेगी।
इसमें सबसे खास होगा ‘सुदर्शन चक्र’ – एक एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे 2035 तक Iron Dome की तरह विकसित किया जाएगा। यह ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट को हवा में ही निष्क्रिय करने में सक्षम होगा। इस तकनीक से भारत विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी छलांग लगाएगा।

वैश्विक परिदृश्य और भारत की भविष्य की राह
आज अमेरिका, चीन और इजरायल जैसे देशों के पास अत्याधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक मौजूद है। भारत ने भी DRDO और निजी कंपनियों के जरिए कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जैसे रुस्तम, TAPAS और स्वदेशी निगरानी ड्रोन।
‘कोल्ड स्टार्ट 2025’ के जरिए भारत दुनिया को यह दिखाएगा कि वह न केवल ड्रोन बनाने में सक्षम है बल्कि काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी आत्मनिर्भर हो रहा है।
2030 तक भारत अपने ड्रोन बेड़े को दोगुना करने और 2035 तक ‘सुदर्शन चक्र’ की तैनाती का लक्ष्य रखता है। इससे भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक ड्रोन महाशक्ति बन सकता है। साथ ही यह अभ्यास रक्षा कूटनीति और इंडिजिनस डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देगा।
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