यूपी में यूरिया का खेल- लोग कर रहे हैं कालाबाजारी की हद पार,बाराबंकी में पति-पत्नी के नाम पर 6 बीघा जमीन और बेच दी 85 बोरी खाद।

यूपी में खाद की कालाबाजारी से बिगड़ते हालात

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से लगातार यूरिया और अन्य खादों की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। किसानों को आवश्यक खाद सही समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कई किसान घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर खाद लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कालाबाजारी के ऐसे मामले खुलते हैं जहाँ असली जरूरतमंद किसान वंचित रह जाते हैं।
इससे खेती की लागत बढ़ने लगी है और छोटे किसानों को फसल की पैदावार पर भी असर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि यूरिया की सप्लाई कम है जबकि कालाबाजारी करने वालों को इसकी भरपूर उपलब्धता है।

बाराबंकी का मामला: 6 बीघे खेत पर 85 बोरी खाद

बाराबंकी जिले में सामने आए मामले ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। यहाँ पति-पत्नी के नाम कुल 6 बीघे खेत दर्ज हैं, लेकिन उन्होंने 85 बोरी यूरिया खाद खरीद ली। जाँच में पता चला कि खरीदी गई खाद का बड़ा हिस्सा बाजार में ऊँचे दाम पर बेच दिया गया। यह मामला साफ दर्शाता है कि खाद वितरण प्रणाली में कहीं न कहीं गंभीर खामियाँ हैं।
इतनी बड़ी मात्रा में खाद लेने का कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि 6 बीघे खेत में इतनी खाद की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में यह साफ है कि प्रशासनिक ढिलाई और निगरानी की कमी से यह कालाबाजारी संभव हो पाई।

किसानों पर यूरिया संकट और कर्ज का दबाव

यूरिया की कालाबाजारी का सबसे बड़ा असर छोटे किसानों पर पड़ रहा है। जो किसान अपनी जमीन पर समय पर खाद नहीं डाल पाते, उनकी फसल प्रभावित होती है। इससे पैदावार घटती है और उन्हें घाटा झेलना पड़ता है।
किसानों को मजबूरी में काला बाजार से ऊँचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है। यह स्थिति पहले से कर्ज में डूबे किसानों के लिए और घातक साबित हो रही है। कई किसान बताते हैं कि उन्हें खाद की कमी के कारण दूसरी फसल बोने का समय भी गंवाना पड़ता है, जिससे उनकी साल भर की कमाई प्रभावित हो जाती है।

barabanki

प्रशासन और सरकार की कार्रवाई

प्रदेश सरकार ने यूरिया की सप्लाई पर नजर रखने और कालाबाजारी रोकने के कई दावे किए थे। लेकिन बाराबंकी का यह मामला इन दावों की पोल खोलता है। अब प्रशासन ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
कृषि विभाग का कहना है कि खाद की आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी और दुकानदारों को सख्त निर्देश दिए जाएंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रहेगी या जमीनी स्तर पर किसानों को इसका फायदा मिलेगा?

समाधान की राह और किसानों की उम्मीद

किसानों का मानना है कि खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटलीकरण की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि किसान के आधार कार्ड और जमीन की रिकॉर्डिंग के आधार पर खाद दी जाए तो कालाबाजारी रोकी जा सकती है।
इसके साथ ही यूरिया के विकल्प के तौर पर जैविक खाद और अन्य उर्वरकों को बढ़ावा देना भी जरूरी है। सरकार यदि सही समय पर खाद उपलब्ध कराए और कड़ी निगरानी रखे तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसान अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले सीजन में उन्हें इस संकट से राहत मिलेगी।

Related articles in this category

Meet the MBA Dropout Revolutionizing Agriculture with Disease-Resistant Vegetables
Agriculture
Meet the MBA Dropout Revolutionizing Agriculture with Disease-Resistant Vegetables

January 18, 2026

Discover how an MBA dropout is leveraging grafting technology to cultivate North India's first disease-resistant vegetables, achieving remarkable revenue of ₹90 lakh. This innovative approach is transforming the agricultural landscape.

EIMA Agrimach India 2025: Opening the Doors to an Agricultural Green-Fuel Revolution
Agriculture
EIMA Agrimach India 2025: Opening the Doors to an Agricultural Green-Fuel Revolution

November 29, 2025

EIMA Agrimach India 2025 concluded with a strong emphasis on adopting green-fuel technologies in agriculture, aiming to revolutionize farm tech for a sustainable future.

भारत की 5 सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा देने वाली फसलें
Agriculture
भारत की 5 सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा देने वाली फसलें

August 31, 2025

भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की आमदनी का बड़ा हिस्सा सही फसल चयन पर निर्भर करता है। गन्ना, धान, गेहूँ, सब्ज़ियाँ और मसाले ऐसी प्रमुख फसलें हैं, जो न सिर्फ घरेलू बाज़ार में बल्कि निर्यात के माध्यम से भी किसानों को ज़्यादा मुनाफ़ा दिलाती हैं। सही प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

यूरिया संकटबाराबंकी खाद घोटालाकालाबाजारीकिसान संकटसरकार कार्रवाईउर्वरक संकट
Kuldeep Pandey
Kuldeep Pandey
Content Writer & News Reporter

I’m a passionate writer who loves exploring ideas, sharing stories, and connecting with readers through meaningful content.I’m dedicated to sharing insights and stories that make readers think, feel, and discover something new.