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संगम पर पहला मुख्य स्नान और आस्था का सैलाब
पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेले की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। भोर से पहले ही संगम तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे और जय संगम के उद्घोष के बीच साधु-संतों ने शाही अंदाज़ में स्नान किया, जबकि गृहस्थ श्रद्धालुओं ने परिवार सहित डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।
इस अवसर पर अखाड़ों के संत, नागा साधु, कल्पवासी और दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु एक ही भाव में दिखे। स्नान के बाद दान, तर्पण, हवन और भंडारों का आयोजन हुआ। कई श्रद्धालुओं ने पूरे माघ मास तक संगम तट पर रहकर कल्पवास का संकल्प लिया, जिसमें संयमित जीवन, सत्संग और सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है।

मेला क्षेत्र की व्यापक तैयारियां और प्रशासनिक इंतजाम
माघ मेला क्षेत्र को अस्थायी नगरी के रूप में विकसित किया गया है। प्रशासन ने यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए बहुस्तरीय इंतजाम किए हैं। संगम और घाटों पर गोताखोर, जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग, एक-तरफा मार्ग और कंट्रोल रूम से निगरानी की गई।
स्वास्थ्य सुविधाओं में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस, मोबाइल मेडिकल यूनिट और दवा वितरण केंद्र सक्रिय रहे। स्वच्छता के लिए सफाई कर्मियों की तैनाती, कचरा प्रबंधन और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु रैन बसेरे, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं।
रेलवे और परिवहन विभाग ने विशेष ट्रेनों व अतिरिक्त बस सेवाओं का संचालन किया, जिससे संगम तक पहुंच सुगम बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि आगामी प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा।
धार्मिक महत्व, कल्पवास और सांस्कृतिक रंग
माघ मेला केवल स्नान का आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव है। संगम तट पर कल्पवासी पूरे महीने नियम-संयम से रहते हैं—प्रातः स्नान, जप-तप, प्रवचन, भजन-कीर्तन और सेवा उनके दैनिक जीवन का हिस्सा होता है। विभिन्न अखाड़ों और संतों के शिविरों में धर्मोपदेश, कथा-वाचन और सत्संग चलते रहते हैं।
मेले में लोक-संस्कृति की भी झलक मिलती है। भजन मंडलियां, आध्यात्मिक संगोष्ठियां और सेवा शिविर वातावरण को भक्तिमय बनाते हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस अनूठे आध्यात्मिक अनुभव के साक्षी बनते हैं।
आगे के प्रमुख स्नान और श्रद्धालुओं के लिए अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, घाटों पर संयम बरतें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। आगामी स्नान पर्वों के दौरान भी संगम तट पर भारी भीड़ रहने की संभावना है, इसलिए समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों का पालन आवश्यक है।
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