I’m a passionate writer who loves exploring ideas, sharing stories, and connecting with readers through meaningful content.I’m dedicated to sharing insights and stories that make readers think, feel, and discover something new.
अमेठी में राम कथा का शुभारंभ: भक्तिभाव में डूबा वातावरण
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित विधायक निवास परिसर रविवार को एक भव्य धार्मिक आयोजन का साक्षी बना, जब यहाँ श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस पर क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए, जिन्होंने भक्ति और श्रद्धा से भरा माहौल बना दिया। कथा मंच को फूलों से सजाया गया था, भगवा झंडों से पूरा परिसर आलोकित था और चारों ओर “जय श्रीराम” के जयघोष गूंज रहे थे।
कथा वाचक शांतनु जी महाराज ने प्रारंभ में मंगलाचरण किया और भगवान श्रीगणेश, माता सीता, लक्ष्मण और प्रभु श्रीराम की वंदना की। इसके पश्चात उन्होंने श्रीराम कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा —
“कथा केवल कहानी नहीं होती, यह आत्मा की यात्रा होती है जो व्यक्ति को उसके भीतर के ‘राम’ से मिलाती है।”
कथा के आरंभ में शांतनु जी महाराज ने बताया कि श्रीराम केवल एक राजा या मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हैं, बल्कि वह आदर्श हैं जिनके जीवन से हर व्यक्ति कुछ न कुछ सीख सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज तनाव, ईर्ष्या, क्रोध और असंतोष से जूझ रहा है, तब श्रीराम की कथा लोगों के मन को शुद्ध करने का माध्यम है।
पहले दिन कथा में राम जन्म से लेकर बाल्यकाल की लीलाओं का वर्णन किया गया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते रहे, बीच-बीच में भजन और चौपाइयों के माध्यम से माहौल और भी भावनात्मक हो गया। कथा स्थल पर महिलाएं आरती थाल लिए बैठी थीं, पुरुष folded hands के साथ ध्यानमग्न थे और बच्चों के लिए यह भक्ति का एक नया अनुभव था।
2. शांतनु जी महाराज ने बताया कथा का वास्तविक अर्थ और जीवन में उपयोगिता
शांतनु जी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि “कथा मनुष्य के भीतर के विकारों को दूर करती है।” उन्होंने समझाया कि जब मनुष्य निरंतर जीवन की भागदौड़ में उलझ जाता है, तो उसके भीतर नकारात्मकता घर कर लेती है। कथा श्रवण उस मन को शांत करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा —
“जो व्यक्ति प्रतिदिन कथा सुनता है या राम नाम का जाप करता है, उसके जीवन में धीरे-धीरे प्रकाश फैलने लगता है। मन के अंधकार मिटने लगते हैं, और वह अपने आप में स्थिर हो जाता है।”
कथा के बीच उन्होंने कई प्रेरक प्रसंग सुनाए, जिनमें उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में कठिनाइयों के बावजूद ‘धैर्य’ और ‘सत्य’ का साथ नहीं छोड़ा। यही संदेश आज के समाज के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन है।
महाराज ने कहा कि कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने के लिए होती है। जब व्यक्ति कथा से मिली सीख को अपने व्यवहार में लाता है, तभी वह सच्चे अर्थों में भक्त कहलाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कथा के बाद केवल जयकारा ही न लगाएं, बल्कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने का संकल्प लें।
इसके अलावा शांतनु जी महाराज ने समाज में बढ़ती नकारात्मकता, मतभेद और तनाव को भी कथा के माध्यम से जोड़ते हुए कहा —
“अगर हर घर में एक सप्ताह कथा का आयोजन होने लगे, तो समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भावना अपने आप बढ़ेगी।”
इस अवसर पर क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों ने सहयोग किया। मंच पर कथा समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आमजन मौजूद रहे।

3. श्रद्धालुओं की भीड़, भक्ति में डूबा अमेठी: कथा का समाज पर प्रभाव
कथा के पहले ही दिन अमेठी में भक्ति का ऐसा दृश्य देखने को मिला जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में बस जाएगा। सुबह से ही श्रद्धालु कथा स्थल पर जुटने लगे थे। बाहर प्रसाद वितरण की व्यवस्था थी, जगह-जगह स्वयंसेवक आगंतुकों की सहायता कर रहे थे।
महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी थीं, बच्चों के हाथों में झंडे थे और बुजुर्ग लोग राम नाम का जाप करते हुए आए। जैसे ही कथा शुरू हुई, वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा फैल गई। शांतनु जी महाराज के शब्दों से भावनाओं का ऐसा प्रवाह निकला कि कई भक्तों की आंखें नम हो गईं।
स्थानीय निवासियों का कहना था कि ऐसी भक्ति भावना लंबे समय से नहीं देखी गई थी। एक श्रद्धालु ने बताया —
“हम हर साल कथा में आते हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग अनुभव हुआ। महाराज जी के शब्द सीधे दिल को छू रहे थे।”
कथा स्थल पर साफ-सफाई और व्यवस्था की विशेष सराहना की गई। भोजन वितरण, पानी की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए टेंट लगाए गए थे। अमेठी विधायक ने आयोजन समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक एकता के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।
श्रीराम कथा का उद्देश्य केवल भक्ति नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और प्रेम का प्रसार करना है। कथा समाप्ति पर शांतनु जी महाराज ने कहा —
“जब तक व्यक्ति अपने भीतर के रावण को नहीं जलाता, तब तक बाहरी विजय का कोई अर्थ नहीं। राम कथा हमें अपने भीतर झांकना सिखाती है।”
आने वाले दिनों में कथा के क्रम में राम-वनवास, सीता हरण, हनुमान चरित्र और लंका विजय जैसे प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि समापन दिवस पर विशाल भंडारा और सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी होगा।
Related articles in this category

El Mencho Killed: The Fall of Mexico's Most Powerful Drug Cartel
February 23, 2026
The recent killing of Nemesio Rubén Oseguera Cervantes, known as 'El Mencho', has led to significant upheaval in Mexico as the Jalisco New Generation Cartel faces a power vacuum. This article explores the implications of his death on the drug trade and national security.

Sam Altman vs. Sridhar Vembu: A Clash on AI and Human Energy Consumption
February 22, 2026
In a recent discussion, Sam Altman compared the energy consumption of AI systems to that of humans, prompting a strong rebuttal from Sridhar Vembu. This article explores their contrasting views on energy efficiency and sustainability.

Trump's Loss, India's Gain? How Tariff Order Could Affect Trade Talks
February 20, 2026
The US Supreme Court's decision to strike down Trump's Global Tariffs Policy may have significant implications for India, potentially reshaping trade dynamics. As New Delhi navigates this change, the global trade landscape could see a shift in power.






